❤️Yaadon ka Safarnama-07❤️

वक़्त कहाँ अब तेरा इंतज़ार करूँ ,
वो बीते दिन मैं फिर से याद करूँ,
मैं तो था तेरे इश्क़ में राँझा ,
साँझ-सवेरे बस तेरा ही नाम था ,
सोंचा था बनोगी मेरे सपनो की रानी ,
इस झूठ से मैं बिलकुल अंजान था ,
तेरी इक़ झलक पाने को बेक़रार मैं ,
इस दुनिया से लड़ जाने को तैयार था ,
तेरे लबों पे हँसीं मुस्कराहट बिखेरने को ,
मैं सारी हदें पार करने को तैयार था ,
प्यार के रंगों से मैंने कभी तुझको ,
अपनी मुहब्बत में डुबोया था ,
टूट गया था वो सारा ख़्वाब ,
जो मैंने कभी संजोया था ,
सच थे वो लोग जो अक़्सर ,
मुझे टोका करते थे,
तेरे प्यार में पड़ने से ,
मुझको रोका करते थे ,
तेर इनक़ार के बाद मैं बहुत रोया था,
न जाने कितने दिनों तक फिर ,
तेरी याद में मैं खोया था ,
तुझे पाने के ज़ुनून का था वो असर ,
जिसके कारण मेरे दिल का हुआ बुरा हश्र ,
थी ऐसी रात जो बेहद ख़ुशनसीब थी ,
जिसे चाहा वो भ्रम में मेरे क़रीब थी ,
दिल ने सोंचा तू थी परी ज़न्नत की ,
तुझे पाने को ख़ुदा से की मिन्नतें थी ,
वो दर्द भरे ख़ुशी के लम्हें अब भूल गया हूँ ,
किसी और की तलाश है ज़िन्दगी में ,
अब बेहद मशरूफ़ हो गया हूँ ,
अब वो लम्हा नहीं आएगा ,
जिसमें मैं खो जाऊँगा ,
तूझे न पा कर भी ,
अब कुछ न कुछ हो ही जाऊँगा..!! वक़्त कहाँ अब तेरा इंतज़ार करूँ ,
वो बीते दिन मैं फिर से याद करूँ..।।।। -कबीरा –

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